विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, समूची दुनिया की छ: प्रतिशत आबादी मधुमेह से पीड़ित है। भारत को विश्व की मधाुमेह राजधानी कहा जाता है। इस समय भारत में लगभग पांच करोड़ मधुमेह रोगी हैं। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 के अंत तक यह बढ़कर सात करोड़ हो जाने की आशंका है अर्थात तब हर पांचवां मधुमेह रोगी भारतीय होगा। मधुमेह वृध्दि की दर चिंताजनक है। विश्व भर में इस रोग के निवारण में प्रति वर्ष 250से 400 मिलियन डॉलर खर्च हो जाता है। हर साल लगभग 50लाख लोग नेत्रों की ज्योति खो देते हैं और दस लाख लोग अपने पैर गंवा बैठते है। मधुमेह के कारण प्रति मिनट छ: मौते होती हैं और गुर्दे नाकाम होने का यह प्रमुख कारण है। आज विश्व के लगभग 95 प्रतिशत रोगी टाईप 2 मधुमेह से पीड़ित है।
अनुवांशिक कारणों के आलावा अनियमित जीवन शैली, तनाव, शारीरिक व्यायाम का ना होना इस बीमारी का मुख्य कारण है। इस गंभीर बीमारी के प्रति लोगों में चेतना जागृत करने के लिए प्रत्येक वर्ष 27 जून को विश्व मधुमेह जागृति दिवस मनाया जाता है. अतः इस बीमारी से बचने के लिए आवश्यक है कि हम सब स्वस्थ जीवन-शैली अपनाएं, स्वास्थ्यवर्ध्दक पोषक आहार लें एवं आहार में वसायुक्त पदार्थों और शक्कर की मात्रा कम लेने का प्रयास करें। इसके अलावा प्रति वर्ष एक बार रक्त परीक्षण एवं अन्य जांच भी करवानी चाहिए।
और जो मधुमेह से पीड़ित हैं वो व्यायाम, संतुलित आहार व प्राकृतिक उपचार से ही इस बीमारी पर नियंत्रित पा सकते हैं।
ध्यान रहे कि संतुलित आहार विहार और स्वस्थ जीवन शैली अपनाकर जीवन पर्यंत निरोग रहा जा सकता है। अत:बाल्यावस्था से ही इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। रोगग्रस्त होने के बाद रोगमुक्ति हेतु प्रयास करने से कहीं बेहतर है कि निरोगी काया के लिए स्वाभाविक रूप से सदैव सजग रहा जाये।
