Monday, 20 July 2015

पानी की कीमत को समझें


एक दिन बापू गंगा तट पर कपड़े धो रहे थे। वह हर चीज का उतना ही उपयोग करते थे जितना करना चाहिए। बापू नदी से पानी लेकर कपड़ों में डाल रहे थे। वह कपड़ों को नदी से दूर धो रहे थे ताकि कपड़ों की गंदगी नदी में न जाए। पास ही अनेक ग्रामीण स्नान कर रहे थे और अपने-अपने कामों में लगे थे। बापू देख रहे थे कि लोग जरूरत से ज्यादा पानी ले रहे हैं और उसे व्यर्थ ही बहा रहे हैं। वह लोगों को बिना कुछ बोले इस बारे में बताना चाहते थे। इसलिए चुपचाप अपने काम में लगे हुए थे।

एक ग्रामीण बहुत देर से बापू को देख रहा था। उसने महसूस किया कि बापू नदी से थोड़ा सा पानी लेते हैं और उसे कपड़ों पर डालते हैं। कुछ देर बाद वह बोला,'बापू जी, एक बात हमारी समझ में नहीं आ रही है। नदी में तो पानी अपार है। फिर पानी लेने में भी आप कंजूसी क्यों बरत रहे हैं? गंगा मैया में पानी की कमी थोड़े ही है। इसका प्रयोग तो जी भर के करिए।' ग्रामीण को ऐसा बोलते देख दूसरे लोग भी उसकी हां में हां मिलाने लगे।

उन्हें ऐसा बोलते देख बापू बोले, 'आप गलत कह रहे हैं। यदि सभी लोग ऐसे ही पानी बर्बाद करते रहे तो एक दिन गंगा नदी गायब ही हो जाएगी। फिर कहां से पानी व्यर्थ बहाओगे और कैसे गंगा मैया की पूजा करोगे?' बापू की बात सुनकर वहां उपस्थित लोग खामोश रह गए। उन्हें समझ आ गया कि बापू क्यों पानी को भी तोल-मोल कर प्रयोग कर रहे थे। उन्होंने बापू से वादा किया कि आगे से वह पानी का सदुपयोग करेंगे और उसे व्यर्थ नहीं गंवाएंगे।

Read more…

Monday, 13 July 2015

क्रोध ही राक्षस है

श्रीकृष्ण, उनके बड़े भाई बलराम और मित्र सात्यकि एक घने वन से होकर गुजर रहे थे। रात वन में ही ठहर गए। लेकिन उस वन में हिंसक पशुओं के साथ राक्षसों का भी डर था, इसलिए तय हुआ कि रात के तीनों प्रहर वे तीनों बारी-बारी से पहरा देंगे और चौथे प्रहर आगे चल पड़ेंगे। प्रथम प्रहर में सात्यकि पहरे पर थे। श्रीकृष्ण व बलराम सो रहे थे। तभी एक भयंकर राक्षस आया। उसने आक्रमण करने की कोशिश की तो सात्यकि को क्रोध आ गया। वे उससे लड़ने लगे।
ज्यों-ज्यों सात्यकि ज्यादा क्रोध करते राक्षस का आकार व बल और बढ़ जाता। राक्षस ने सात्यकि को घायल कर दिया। जब प्रथम पहर बीत गया तो राक्षस अदृश्य हो गया। तब सात्यकि ने बलराम को जगाया। जब बलराम पहरा देने लगे तो उनके साथ भी वैसा ही हुआ। दूसरा प्रहर बीतने पर श्रीकृष्ण उठे। जब राक्षस उनके सामने आया तो क्रोध करने के बजाय वे हंसने लगे। उनके हंसने से राक्षस का बल घटने लगा, साथ ही उसके शरीर का आकार छोटा होने लगा।
राक्षस जितनी तेजी से झपटता श्रीकृष्ण उतनी ही नरमी से उसके वार को झेलते हुए हंस पड़ते। धीरे-धीरे राक्षस एक कीड़े जितना छोटा हो गया। श्रीकृष्ण ने उसे अपने दुपट्टे के छोर में बांध लिया। चौथे प्रहर जब सात्यकि और बलराम उठे तो श्रीकृष्ण ने उनकी घायल अवस्था का कारण पूछा। उन्होंने राक्षस की बात बताई। तब श्रीकृष्ण दुपट्टे में बंधे कीड़े को दिखाते हुए बोले- यही है वह राक्षस। वस्तुत: क्रोध ही राक्षस है। जितना क्रोध आप करते गए, यह उतना बढ़ता गया। मैंने क्रोध नहीं किया तो यह छोटा हो गया। क्रोध न करें तो उसका विस्तार नहीं हो सकता।

Read more…

Saturday, 11 July 2015

दुनिया एक सराय है।


एक राज्य में एक राजा रहता था जो बहुत घमंडी था । उसके घमंड के चलते आस पास के राज्य के राजाओं से भी उसके संबंध अच्छे नहीं थे । उसके घमंड की वजह से सारे राज्य के लोग उसकी बुराई करते थे । एक बार उस गाँव से एक साधु महात्मा गुजर रहे थे उन्होंने ने भी राजा के बारे में सुना और राजा को सबक सिखाने की सोची।

साधु तेजी से राजमहल की ओर गए और बिना प्रहरियों से पूछे सीधे अंदर चले गए । राजा ने देखा तो वो गुस्से में भर गया । राजा बोला – ये क्या उदण्डता है महात्मा जी, आप बिना किसी की आज्ञा के अंदर कैसे आ गए? साधु ने विनम्रता से उत्तर दिया – मैं आज रात इस सराय में रुकना चाहता हूँ । राजा को ये बात बहुत बुरी लगी वो बोला -महात्मा जी ये मेरा राज महल है कोई सराय नहीं ,कहीं और जाइये ।

साधु ने कहा – हे राजा , तुमसे पहले ये राजमहल किसका था ? राजा – मेरे पिताजी का , साधु – तुम्हारे पिताजी से पहले ये किसका था ? राजा – मेरे दादाजी का । साधु ने मुस्करा कर कहा – हे राजा, जिस तरह लोग सराय में कुछ देर रहने के लिए आते है वैसे ही ये तुम्हारा राज महल भी है जो कुछ समय के लिए तुम्हारे दादाजी का था , फिर कुछ समय के लिए तुम्हारे पिताजी का था , अब कुछ समय के लिए तुम्हारा है ,कल किसी और का होगा , ये राजमहल जिस पर तुम्हें इतना घमंड है ये एक सराय ही है जहाँ एक व्यक्ति कुछ समय के लिए आता है और फिर चला जाता है ।

 
साधु की बातों से राजा इतना प्रभावित हुआ कि सारा राजपाट ,मान सम्मान छोड़कर साधु के चरणों में गिर पड़ा और महात्मा जी से क्षमा मांगी और फिर कभी घमंड ना करने की शपथ ली ।

मित्रों ,ये कहानी मात्र नहीं है बल्कि इस कहानी में एक बहुत बड़ी सीख छुपी हुई है । ये दुनिया एक सराय के समान है जहाँ कुछ लोग रोज आते हैं और कुछ लोग रोज जाते हैं । अच्छी सोच रखिये , अच्छे काम करिये क्यूंकि इस सराय से एक दिन सबको जाना है 

Read more…

Monday, 29 June 2015

मन की शांति

किसी नगर में एक विद्वान साधु रहता था। लोग उसके पास अपनी समस्याएं लेकर आते और वहां से प्रसन्न होकर लौटते। एक दिन एक सेठ साधु के पास आया और बोला,'महाराज, मेरे पास सब कुछ है, फिर भी मन शांत नहीं रहता। मैं क्या करूं?' साधु कुछ न बोला और उठ कर चल दिया। सेठ भी पीछे-पीछे चल पड़ा। आश्रम के एक खाली कोने में जाकर साधु ने वहां आग जलाई और धीरे-धीरे कर उस आग में एक-एक लकड़ी डालता रहा। हर लकड़ी के साथ आग की लौ तेज होती रही। कुछ देर बाद वह वहां से उठकर वापस अपनी जगह आकर चुपचाप बैठ गया। सेठ भी साधु के पास आकर बैठ गया।

लेकिन जब साधु ने उससे कुछ भी न कहा तो सेठ हैरान होकर बोला,'महाराज, आपने मेरी समस्या का समाधान तो किया नहीं।' सेठ की बात सुनकर साधु मुस्कराते हुए बोला,'मैं इतनी देर से तुम्हारी समस्या का समाधान ही बता रहा था। शायद तुम समझे नहीं। देखो, हर व्यक्ति के अंदर आग होती है। उसमें प्यार की आहुति डालें तो वह मन को शांति और आनंद देती है। यदि उसमें दिन-रात काम, क्रोध, लोभ, मोह और मद की लकड़ियां डाली जाती रहें तो वह मन में अशांति उत्पन्न करती हैं, आग को और भड़काती हैं।

जब तक तुम अशांति फैलाने वाले इन तत्वों को आग में डालना बंद नहीं करोगे, तब तक तुम्हारा मन शांत नहीं होगा।' यह सुनकर सेठ की आंखें खुल गईं। वह प्रसन्न मन से साधु को नमस्कार कर अपने घर लौट आया। उसने भविष्य में अपने अंदर की आग में प्यार, करुणा और परोपकार की आहुति डालने का संकल्प कर लिया।

Read more…

Saturday, 27 June 2015

स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं; मधुमेह को दूर भगाएं


विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, समूची दुनिया की छ: प्रतिशत आबादी मधुमेह से पीड़ित है। भारत को विश्व की मधाुमेह राजधानी कहा जाता है। इस समय भारत में लगभग पांच करोड़ मधुमेह रोगी हैं।  रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 के अंत तक यह बढ़कर सात करोड़ हो जाने की आशंका है अर्थात तब हर पांचवां मधुमेह रोगी भारतीय होगा। मधुमेह वृध्दि की दर चिंताजनक है। विश्व भर में इस रोग के निवारण में प्रति वर्ष 250से 400 मिलियन डॉलर खर्च हो जाता है। हर साल लगभग 50लाख लोग नेत्रों की ज्योति खो देते हैं और दस लाख लोग अपने पैर गंवा बैठते है। मधुमेह के कारण प्रति मिनट छ: मौते होती हैं और गुर्दे नाकाम होने का यह प्रमुख कारण है। आज विश्व के लगभग 95 प्रतिशत रोगी टाईप 2 मधुमेह से पीड़ित है।
अनुवांशिक कारणों के आलावा अनियमित जीवन शैली, तनाव, शारीरिक व्यायाम का ना होना इस बीमारी का  मुख्य कारण है।  इस  गंभीर बीमारी के प्रति लोगों में चेतना जागृत करने के लिए प्रत्येक  वर्ष 27 जून को विश्व मधुमेह जागृति दिवस मनाया जाता है. अतः इस  बीमारी से बचने के लिए  आवश्यक है कि हम सब स्वस्थ जीवन-शैली अपनाएं, स्वास्थ्यवर्ध्दक पोषक आहार लें एवं आहार में वसायुक्त पदार्थों और शक्कर की मात्रा कम लेने का प्रयास करें।  इसके अलावा प्रति वर्ष एक बार रक्त परीक्षण एवं अन्य जांच भी करवानी चाहिए।
और जो मधुमेह से पीड़ित हैं वो व्यायाम, संतुलित आहार व प्राकृतिक उपचार से ही इस बीमारी पर नियंत्रित पा सकते हैं।

ध्यान रहे कि संतुलित आहार विहार और स्वस्थ जीवन शैली अपनाकर जीवन पर्यंत निरोग रहा जा सकता है। अत:बाल्यावस्था से ही इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। रोगग्रस्त होने के बाद रोगमुक्ति हेतु प्रयास करने से कहीं बेहतर है कि निरोगी काया के लिए स्वाभाविक रूप से सदैव सजग रहा जाये।

Read more…

Total Pageviews